वन माफियाओं के आगे नतमस्तक वन विभाग व क्षेत्रीय खाकी

वन माफियाओं के आगे नतमस्तक वन विभाग व क्षेत्रीय खाकी
रायबरेली-- गुरबक्श गंज थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दिनदहाड़े बेखौफ होकर वन माफियाओं के द्वारा  प्रतिबंधित नीम जामुन महुआ सहित अन्य प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है!हरियाली के दुश्मन भू माफिया हरे भरे पेड़ों जंगलों को काट कर रेगिस्तान में तब्दील करते जा रहे हैं!जिसके कारण पर्यावरण में लगातार असंतुलन बढ़ता ही जा रहा है!उसके बावजूद भी  वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है! आखिर इस तरीके से खुलेआम दिनदहाड़े बेखौफ होकर खेत खलिहान में यह वन माफिया कैसे हरे भरे पेड़ों को काट रहे हैं यह एक बहुत ही विचारणीय प्रश्न है!कई बार क्षेत्रीय लोगों के खबर देने के बावजूद भी क्षेत्रीय खाकी इन वन माफियाओं के ऊपर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं करती,जिसके कारण इनके हौंसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं!

 ग्रामीण संवाद सूत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वन माफिया बकायदा  क्षेत्रीय पुलिस को पैसा देकर बेखौफ अंदाज में प्रतिबंधित पेड़ों को काटकर दिनदहाड़े ट्रैक्टर तथा हाइड्रा से ले जाते नजर आते रहते हैं उसके बावजूद भी क्षेत्रीय खाकी तथा वन विभाग पूरी तरह से खामोश है!ताजा मामला  गुरबक्श गंज थाना क्षेत्र के मेदा खेड़ा मजरे कोन्सा का है जहां दिनदहाड़े नीम के पेड़ों पर दिनभर वन माफियाओं का आरा चलता रहा लेकिन क्षेत्रीय खाकी के कानों तक खबर नहीं पहुंची!क्षेत्रीय पत्रकार को प्रतिबंधित नीम के पेड़ों के कटने की सूचना प्राप्त हुई तो मौके पर पहुंचने के बाद देखा कि लगभग आधे दर्जन पेड़ काटे जा चुके थे!संवाददाता ने  उच्चधिकारियो को दूरभाष पर सूचित किया लेकिन फिर भी मौके पर कोई पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा!
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बेखौफ होकर वन माफिया पेड़ काटने में मशगूल रहे जिसकी सूचना डीएफओ को दी गई तो उन्होंने तत्काल कार्यवाही करने का आश्वासन दिया!खबर लिखे जाने तक वन माफियाओं के ऊपर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई है!इन माफियाओं के ऊपर सख्त कार्यवाही ना होने के चलते प्रतिबंधित हरे पेड़ों को काटकर पर्यावरण तथा भूमि को बंजर बनाया जा रहा है जो कि चिंतनीय है!

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