रामभरोसे सीएचसी शिवगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाएं

रामभरोसे सीएचसी शिवगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाएं
डॉक्टर स्टाफ और नर्सें मिली नदारत

शिवगढ़,रायबरेली-- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ में आए दिन डाक्टरों एवं स्टाफ नर्सों का नदारद रहना बिल्कुल आम बात हो गई है। ग्रामीण बोले गायब रहने वाले डाक्टरों पर हो कार्रवाई चाहिए। गौरतलब हो कि सीएचसी शिवगढ़ में 7 एमबीबीएस डॉक्टर है जिसमें 5 पुरुष और 2 महिला डॉक्टर है। वहीं 2 फार्मासिस्ट, 2 वार्ड वार्ड बॉय और 6 स्टाफ नर्सें हैं। कुल मिलाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों की संख्या 60 है। शनिवार को समय 11 बजकर 56 मिनट पर महिला डॉक्टर तरन्नुम व डॉक्टर सुप्रभा तिवारी व 4 स्टाफ नर्स नदारत मिली। नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के ही कर्मचारियों ने बताया कि कई डॉक्टर, स्टाफ नर्स और कर्मचारियों की सेटिंग गेटिंग है। जो सप्ताह में 2-3 दिन आते हैं। जिनको कोई दिक्कत होने वाली नहीं है अधीक्षक साहब कहते हैं हम सब देख लेंगे।
इस बारे में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार गौतम से पूछा गया तो उन्होंने बताया की डाक्टर तरन्नुम नफीस बहुत पहले से ही नही आ रही हैं इन पर कई बार कार्रवाई भी की जा चुकी है। लेकिन डॉक्टर सुप्रभा तिवारी व  स्टाफ नर्शों के बारे में कुछ नही बोले।




 कमीशन के चक्कर में सीएचसी शिवगढ़ में लिखी जा रही बाहर की दवाएं



सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ में कमीशन के चक्कर में धड़ल्ले से बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।  एक तरफ प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। शासन का सख्त निर्देश है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को नि:शुल्क दवाएं दी जाएं बाहर की दवाएं बिल्कुल न लिखी जाएं किन्तु सीएचसी शिवगढ़ में  शासन की मंशा पर पानी फेरा जा रहा है। सरकार के निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आलम यह है कि सर्दी, जुखाम, बुखार की दवाएं 500 रुपये से 1000 रुपये तक लिखी जा रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण शनिवार को देखने को मिला। बहुदा खुर्द की रहने वाली सुनीता ने बताया कि दवा लेने आए थे बाहर से दवा लिये हैं कुछ दवा अन्दर से दी गई है। तो वहीं तिवारीपुर से दवा लेने आई संगीता ने बताया कि बाहर से दवा लिखी गई थी यहां भी दी गई थी 380 की बाहर से दवा लेकर आए हैं। रामपुर निवासी चंदा ने बताया कि कुछ दवा दी जाती है और बाहर से लिखी जाती है। इसी तरह से राजरानी का कहना था कि नाम मात्र की दवाएं दी जाती हैं अधिकतर दवाएं बाहर से  लिखी जाती हैं। 1 सप्ताह की दवा 400-500 की होती है। इस बारे में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ.राजेश कुमार गौतम से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमने सभी डाक्टरो को निर्देश दिया है की बाहर की दवाएं बिल्कुल ना लिखें। यदि कोई दवा अस्पताल में नही होती है तो बाहर की लिख दी जाती है। लेकिन यदि इस तरह दवाएं बाहर से लिखी जा रही है तो जांच कराकर दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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